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🙏एक बार एक आदमी की मृत्यु हो जाती है, तो वो देखता है की भगवान हाथ मे एक सूटकेस लिए उसकी तरफ आ रहें हैं।
🙏भगवान और उस मृत व्यक्ति के बीच का वार्तालाप ...
🙏भगवान: चलो बच्चे वापिस जाने का समय हो चुका है।
🙏मृतक : इतनी जल्दी? मेरी तो अभी बहुत सारी योजनाये बाकी थी, लेकिन आपके पास उस सूटकेस में क्या है?
🙏भगवान : तुम्हारा सामान ।
🙏मृतक : आपका मतलब मेरी वस्तुएँ....मेरे कपड़े....मेरा धन..?
🙏भगवान : वो चीजें कभी भी तुम्हारी नहीं थी बल्कि इस पृथ्वी लोक की थी ।
🙏मृतक : तो क्या इसमे मेरी यादें हैं ?
🙏भगवान : नहीं, उनका संबंध तो समय से था।
🙏मृतक : क्या इसमें मेरी योग्यताएं हैं ?
🙏भगवान : नहीं ! उनका संबंध तो परिस्थितियों से था।
🙏मृतक : तब क्या मेरे दोस्त और मेरा परिवार ?
🙏भगवान : नही, उनका संबंध तो उस रास्ते से था जिस पर तुमने अपनी यात्रा की थी।
🙏मृतक : तो क्या मेरे बच्चे और पत्नी ?
🙏भगवान : नहीं, उनका संबंध तो तुम्हारे मन से था।
🙏मृतक : तब तो ये मेरा शरीर होना चाहिए ?
🙏भगवान्: नहीं नहीं ! उसका संबंध तो पृथ्वी की धूल मिटटी से था।
🙏मृतक : तब तो ये मेरी आत्मा होनी चाहिए ?
🙏भगवान : तुम फिर गलत समझ रहे हो, तुम्हारी आत्मा का संबंध सिर्फ मुझसे है।
🙏तब उस मृतव्यक्ति ने आँखों में आंसू भरकर भगवान के हाथों से सूटकेस लिया और उसे डरते डरते खोला, लेकिन ये क्या ? सूटकेस एकदम खाली ! वह अत्यंत निराश हुआ, उसने भगवान से पूछा। क्या मेरी कोई चीज कभी अपनी थी ही नही ? तब मेरा अपना क्या था ?
🙏भगवान : तुम्हारे पल, प्रत्येक लम्हा, प्रत्येक क्षण जो तुमने जिया वो तुम्हारा था।



🙏इसलिए हर पल अच्छा काम करो..
🙏हर लम्हा अच्छा सोचो...
🙏और हर क्षण भगवान का शुक्रिया अदा करो.!

🙏 🙏 ॐ नमः शिवाय 🙏

Reviewed by Unknown on 00:24 Rating: 5

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