अपवित्र

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एक पण्डित जी मेरे मित्र हैं ।
पत्राचार से 12वीं कक्षा पास हैं ।
हर बात में अपनी विद्वत्ता दिखाते हैं ।
एक दिन एक बच्चे से उलझ गये ।
बच्चे ने भी एक प्रश्न दाग दिया कि,
"वो कौन-सी वस्तु है, जो कभी
अपवित्र नहीं होती......?"
पण्डित जी टोपी उतार कर
पसीने-पसीने हो गये, मगर, उस
बच्चे के प्रश्न का जवाब नहीं दे पाये ।
आखिर, हार मान कर बोले, चल तू बता ।
बच्चे ने कहा कि कभी न अपवित्र होने
वाली वस्तु है,
टैन्ट हाउस के गद्दे, जिसे......
हिन्दू,-मुसलमान से ले कर पण्डित, चमार, डोम और
भंगी तक इस्तेमाल करते हैं । ये गद्दे मैयत से
लेकर पूजा पण्डाल तक और धार्मिक कथा से ले कर
उठावनी तक हर मौके पर बिछते हैं । इनको कोई
सुतक भी नहीं लगता ।
बाराती भी इन गद्दों पर सोम-रस
पीने के बाद वमन करते हैं । छोटे बच्चों को
सुविधानुसार इन पर पेशाब करा दिया जाता है । इतना
ही नहीं, इन पर
बिछी चादरों से जूते भी चमका लियेे
जाते हैं । हद तो तब होती है, जब हलवाई इन
चादरों में पनीर का चक्का लटका देता है ।
उसी पनीर से क्या मजे का मटर-
पनीर बनता है......!!
.
😦
पण्डित चारों खाने चित था.....!!
बच्चा पण्डित जी पर पानी के
छीटे मार रहा था......!!
.
उन गद्दों और उनकी चादरों के बारे में अब आप
का क्या ख़याल है ......
अपवित्र अपवित्र Reviewed by Unknown on 00:24 Rating: 5

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