#ॐ_कट्टर_हिन्दू_मोहित_ॐ
*
वह बेटे को कुछ समझाते हुए महाभारत का रेफरेंस दे रहा था बेटा,,,
Conflict को जहाँ तक हो सके, avoid करना चाहिए...
:
महाभारत से पहले कृष्ण भी गए थे दुर्योधन के दरबार में यह प्रस्ताव लेकर, कि हम युद्ध नहीं चाहते...
:
तुम पूरा राज्य रखो...
पाँडवों को सिर्फ पाँच गाँव दे दो...
वे चैन से रह लेंगे, तुम्हें कुछ नहीं कहेंगे...
:
बेटे ने पूछा - पर इतना unreasonable proposal लेकर कृष्ण गए क्यों थे...?
:
अगर दुर्योधन प्रोपोजल एक्सेप्ट कर लेता तो...?
:
नहीं करता...
:
कृष्ण को पता था कि वह प्रोपोजल एक्सेप्ट नहीं करेगा...
उसके मूल चरित्र के विरुद्ध था फिर कृष्ण ऐसा प्रोपोजल लेकर गए ही क्यों थे? -
:
वे तो सिर्फ यह सिद्ध करने गए थे कि दुर्योधन कितना अनरीजनेबल, कितना अन्यायी था...
:
वे पाँडवों को सिर्फ यह दिखाने गए थे, कि देख लो बेटा...
युद्ध तो तुमको लड़ना ही होगा हर हाल में...
:
अब भी कोई शंका है तो निकाल दो मन से...
:
तुम कितना भी संतोषी हो जाओ, कितना भी चाहो कि घर में चैन से बैठूँ,,,
:
दुर्योधन तुमसे हर हाल में लड़ेगा ही. लड़ना या ना लड़ना तुम्हारा ऑप्शन नहीं है...
फिर भी बेचारे अर्जुन को आखिर तक शंका रही...
:
कृष्ण ने सत्रह अध्याय तक फंडा दिया...
फिर भी शंका थी...
ज्यादा अक्ल वालों को ही ज्यादा शंका होती है...
:
दुर्योधन को कभी शंका नही थी, उसे हमेशा पता था कि उसे युद्ध करना ही है...उसने गणित लगा रखा था...
:
हिन्दुओं को भी समझ लेना है...
कन्फ्लिक्ट होगा या नहीं, यह आपका ऑप्शन नहीं है...
:
आपने तो पाँच गाँव का प्रोपोजल भी देकर देख लिया...
:
देश के टुकड़े मंजूर कर लिए,,,
हर बात पर विशेषाधिकार देकर देख लिया...
हज के लिए सबसिडी देकर देख ली, उनके लिए अलग नियम कानून बनवा कर देख लिए...
:
आप चाहे जो कर लीजिए, उनकी माँगें नहीं रुकनेवाली...
:
उन्हें सबसे स्वादिष्ट उसी गौमाता का माँस लगेगा जो आपके लिए पवित्र है, उसके बिना उन्हें भयानक कुपोषण हो रहा है...
:
उन्हें सबसे प्यारी वहीं मस्जिदें हैं, जो आपके मंदिरों को तोड़ कर बनी हैं...
:
उन्हें सबसे ज्यादा परेशानी उसी आवाज से है जो मंदिरों और पूजा-पंडालों से है...
यह माँगें गाय को काटने तक नहीं रुकेंगी...
यह समस्या मंदिरों तक नहीं रहने वाली, यह आपके घर तक आने वाली है...
:
आपकी बहू-बेटियों तक जाने वाली है... आज का तर्क है,,,
:
तुम्हें गाय इतनी प्यारी है तो सड़कों पर क्यों घूम रही है, हम तो काट कर खाएँगे...
:
कल कहेंगे, तुम्हारी बेटी की इतनी इज्जत है तो वह घर से क्यों निकलती है, हम तो उठा कर ले जाएँगे...
उन्हें समस्या गाय से नहीं है...
तुम्हारे अस्तित्व से है...
:
तुम जब तक हो, उन्हें कुछ ना कुछ प्रॉब्लम रहेगी...
इसलिए और डाउट मत पालो...
प्रतिकार करो...
प्राब्लम को समूल नष्ट करो...
:
आज कृष्ण का यही उपदेश है।।
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मैं अपने ब्राह्मणत्व को निभा कर आपको लगातार जागृत कर रहा हूँ ।
जागो हिन्दू जागो
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वह बेटे को कुछ समझाते हुए महाभारत का रेफरेंस दे रहा था बेटा,,,
Conflict को जहाँ तक हो सके, avoid करना चाहिए...
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महाभारत से पहले कृष्ण भी गए थे दुर्योधन के दरबार में यह प्रस्ताव लेकर, कि हम युद्ध नहीं चाहते...
:
तुम पूरा राज्य रखो...
पाँडवों को सिर्फ पाँच गाँव दे दो...
वे चैन से रह लेंगे, तुम्हें कुछ नहीं कहेंगे...
:
बेटे ने पूछा - पर इतना unreasonable proposal लेकर कृष्ण गए क्यों थे...?
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अगर दुर्योधन प्रोपोजल एक्सेप्ट कर लेता तो...?
:
नहीं करता...
:
कृष्ण को पता था कि वह प्रोपोजल एक्सेप्ट नहीं करेगा...
उसके मूल चरित्र के विरुद्ध था फिर कृष्ण ऐसा प्रोपोजल लेकर गए ही क्यों थे? -
:
वे तो सिर्फ यह सिद्ध करने गए थे कि दुर्योधन कितना अनरीजनेबल, कितना अन्यायी था...
:
वे पाँडवों को सिर्फ यह दिखाने गए थे, कि देख लो बेटा...
युद्ध तो तुमको लड़ना ही होगा हर हाल में...
:
अब भी कोई शंका है तो निकाल दो मन से...
:
तुम कितना भी संतोषी हो जाओ, कितना भी चाहो कि घर में चैन से बैठूँ,,,
:
दुर्योधन तुमसे हर हाल में लड़ेगा ही. लड़ना या ना लड़ना तुम्हारा ऑप्शन नहीं है...
फिर भी बेचारे अर्जुन को आखिर तक शंका रही...
:
कृष्ण ने सत्रह अध्याय तक फंडा दिया...
फिर भी शंका थी...
ज्यादा अक्ल वालों को ही ज्यादा शंका होती है...
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दुर्योधन को कभी शंका नही थी, उसे हमेशा पता था कि उसे युद्ध करना ही है...उसने गणित लगा रखा था...
:
हिन्दुओं को भी समझ लेना है...
कन्फ्लिक्ट होगा या नहीं, यह आपका ऑप्शन नहीं है...
:
आपने तो पाँच गाँव का प्रोपोजल भी देकर देख लिया...
:
देश के टुकड़े मंजूर कर लिए,,,
हर बात पर विशेषाधिकार देकर देख लिया...
हज के लिए सबसिडी देकर देख ली, उनके लिए अलग नियम कानून बनवा कर देख लिए...
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आप चाहे जो कर लीजिए, उनकी माँगें नहीं रुकनेवाली...
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उन्हें सबसे स्वादिष्ट उसी गौमाता का माँस लगेगा जो आपके लिए पवित्र है, उसके बिना उन्हें भयानक कुपोषण हो रहा है...
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उन्हें सबसे प्यारी वहीं मस्जिदें हैं, जो आपके मंदिरों को तोड़ कर बनी हैं...
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उन्हें सबसे ज्यादा परेशानी उसी आवाज से है जो मंदिरों और पूजा-पंडालों से है...
यह माँगें गाय को काटने तक नहीं रुकेंगी...
यह समस्या मंदिरों तक नहीं रहने वाली, यह आपके घर तक आने वाली है...
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आपकी बहू-बेटियों तक जाने वाली है... आज का तर्क है,,,
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तुम्हें गाय इतनी प्यारी है तो सड़कों पर क्यों घूम रही है, हम तो काट कर खाएँगे...
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कल कहेंगे, तुम्हारी बेटी की इतनी इज्जत है तो वह घर से क्यों निकलती है, हम तो उठा कर ले जाएँगे...
उन्हें समस्या गाय से नहीं है...
तुम्हारे अस्तित्व से है...
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तुम जब तक हो, उन्हें कुछ ना कुछ प्रॉब्लम रहेगी...
इसलिए और डाउट मत पालो...
प्रतिकार करो...
प्राब्लम को समूल नष्ट करो...
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आज कृष्ण का यही उपदेश है।।
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मैं अपने ब्राह्मणत्व को निभा कर आपको लगातार जागृत कर रहा हूँ ।
जागो हिन्दू जागो
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