Ekमाँ की आँख
लगी ही थी कि उसका 12
साल का बेटा स्कूल से घर आया और बोला : माँ
, मैं अब बड़ा हो गया हुँ और स्कूल के बाकी
बच्चे मुझे ये कहकर चिढ़ाते है कि मैं रोज ये
फटी हुई शर्ट पहन कर आता हूँ । मुझे नया
शर्ट चाहिए ।
.
दूसरों के घरों में बर्तन मांझ कर अपना घर
चलाने वाली माँ बेटे की इस फरमाइश को टाल
ना सकी
और बोली कि कल
दिलवा दूंगी ।
.
बेटा भी बेमन से बात मानकर अपने काम में लग
गया ।
माँ ने सोचा कि शाम को मालकिन से रुपये मांग
लूंगी और कल दिलवा दूंगी ।
मगर मालकिन से रुपये मांगे तो उसने ये कहकर
मना कर
दिया कि अभी 3 दिन पहले
ही तो उसका महीना शुरु हुआ है । अभी रुपये
नहीं मिल सकते ।
.
माँ भी चुपचाप बर्तन मांझ कर घर आ गयी ।
अगले दिन जब बेटे ने शर्ट दिलाने की बात
बोली तो माँ सोच में पड़ गई । फिर सोचा कि
अपने किसी जानने वाले के यहाँ से उधार
दिलवा देती हूँ,
जब रुपये आयेंगे तब चुका दूंगी । इसी सोच के
साथ माँ अपने जानने वाले की दुकान पर पहुँची
,
.
वहाँ अपने बेटे को शर्ट पसंद कराई । जब बारी
रुपये देने की आई तो माँ ने दुकानदार को उधार
करने को बोला लेकिन वो भी आनाकानी करने
लगा और आखिर में उसने साफ मना
कर दिया ।
.
ये बात बेटे ने सुन ली । अचानक बेटे से माँ से
कहा कि माँ, मुझे ये शर्ट नहीं चाहिए । हम बाद
में ले लेंगे और वैसे भी स्कूल में मुझे ठंड लगती है
तो मैं कल से उस फटी शर्ट के ऊपर स्वेटर
पहन कर जाया करुंगा । इतना कहकर बेटा
दुकान से बाहर आ गया ।
माँ की आँखो मे आँसू झलक आये माँ को अब
समझ में आ गया कि बेटा सच में बड़ा हो गया ।
.
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कैसी लगी कमेंट करके जरूर बताये और आप भी
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लगी ही थी कि उसका 12
साल का बेटा स्कूल से घर आया और बोला : माँ
, मैं अब बड़ा हो गया हुँ और स्कूल के बाकी
बच्चे मुझे ये कहकर चिढ़ाते है कि मैं रोज ये
फटी हुई शर्ट पहन कर आता हूँ । मुझे नया
शर्ट चाहिए ।
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चलाने वाली माँ बेटे की इस फरमाइश को टाल
ना सकी
और बोली कि कल
दिलवा दूंगी ।
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बेटा भी बेमन से बात मानकर अपने काम में लग
गया ।
माँ ने सोचा कि शाम को मालकिन से रुपये मांग
लूंगी और कल दिलवा दूंगी ।
मगर मालकिन से रुपये मांगे तो उसने ये कहकर
मना कर
दिया कि अभी 3 दिन पहले
ही तो उसका महीना शुरु हुआ है । अभी रुपये
नहीं मिल सकते ।
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माँ भी चुपचाप बर्तन मांझ कर घर आ गयी ।
अगले दिन जब बेटे ने शर्ट दिलाने की बात
बोली तो माँ सोच में पड़ गई । फिर सोचा कि
अपने किसी जानने वाले के यहाँ से उधार
दिलवा देती हूँ,
जब रुपये आयेंगे तब चुका दूंगी । इसी सोच के
साथ माँ अपने जानने वाले की दुकान पर पहुँची
,
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वहाँ अपने बेटे को शर्ट पसंद कराई । जब बारी
रुपये देने की आई तो माँ ने दुकानदार को उधार
करने को बोला लेकिन वो भी आनाकानी करने
लगा और आखिर में उसने साफ मना
कर दिया ।
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ये बात बेटे ने सुन ली । अचानक बेटे से माँ से
कहा कि माँ, मुझे ये शर्ट नहीं चाहिए । हम बाद
में ले लेंगे और वैसे भी स्कूल में मुझे ठंड लगती है
तो मैं कल से उस फटी शर्ट के ऊपर स्वेटर
पहन कर जाया करुंगा । इतना कहकर बेटा
दुकान से बाहर आ गया ।
माँ की आँखो मे आँसू झलक आये माँ को अब
समझ में आ गया कि बेटा सच में बड़ा हो गया ।
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