जयमल सिंह मेड़तिया और कल्ला जी राठौड़-----
जब दुष्ट अकबर ने 1568 में चित्तौड़ पर 80 हजार मुगलो के साथ हमला किया था तो वीर जयमल राठौर और फत्ता जी सिसोदिया के नेतृत्व में 8 हजार राजपूतो ने अकबर की दस गुनी सेना के दांत खट्टे कर दिए थे।
जब अकबर की गोली से जयमल जी की टांग क्षतिग्रस्त हो गयी तब जयमल जी ने कल्ला जी राठौर के कंधे पर बैठकर भीषण युद्ध किया।
इस द्रश्य को देखकर अकबर भी मूर्छित हो गया था उसने हिन्दुओ के भगवान चतुर्भुज के बारे में सुन रखा था और चार हाथो और पैरो से भी तलवार चलाते देख उसे लगा कि मानो साक्षात् भगवान चतुर्भुज ही युद्ध करने आ पहुंचे हों।
सैंकड़ो क्षत्राणियों ने जौहर किया किन्तु अपने सतीत्व की मुगलो से रक्षा की,हजारो क्षत्रिय बलिदान हो गए पर क्षत्रियों का भगवा ध्वज झुकने नही दिया।
वीर जयमल, फत्ता ,कल्ला जी,ईसरदास आदि हजारो वीर क्षत्रियों और जौहर की आग में खुद को स्वाह कर देने वाली क्षत्राणियों को कोटि कोटि नमन।
जब दुष्ट अकबर ने 1568 में चित्तौड़ पर 80 हजार मुगलो के साथ हमला किया था तो वीर जयमल राठौर और फत्ता जी सिसोदिया के नेतृत्व में 8 हजार राजपूतो ने अकबर की दस गुनी सेना के दांत खट्टे कर दिए थे।
जब अकबर की गोली से जयमल जी की टांग क्षतिग्रस्त हो गयी तब जयमल जी ने कल्ला जी राठौर के कंधे पर बैठकर भीषण युद्ध किया।
इस द्रश्य को देखकर अकबर भी मूर्छित हो गया था उसने हिन्दुओ के भगवान चतुर्भुज के बारे में सुन रखा था और चार हाथो और पैरो से भी तलवार चलाते देख उसे लगा कि मानो साक्षात् भगवान चतुर्भुज ही युद्ध करने आ पहुंचे हों।
सैंकड़ो क्षत्राणियों ने जौहर किया किन्तु अपने सतीत्व की मुगलो से रक्षा की,हजारो क्षत्रिय बलिदान हो गए पर क्षत्रियों का भगवा ध्वज झुकने नही दिया।
वीर जयमल, फत्ता ,कल्ला जी,ईसरदास आदि हजारो वीर क्षत्रियों और जौहर की आग में खुद को स्वाह कर देने वाली क्षत्राणियों को कोटि कोटि नमन।
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